पदच्छेदः
| ऊचुश्च | ऊचुः (√वच् लिट् प्र.पु. बहु.)–च (अव्ययः) |
| देवदेवेशं | देवदेवेश (२.१) |
| वरदं | वर–द (२.१) |
| प्रपितामहम् | प्रपितामह (२.१) |
| कच्चिल् | कश्चित् (१.१) |
| लोकक्षयो | लोक–क्षय (१.१) |
| देव | देव (८.१) |
| प्राप्तो | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| युगसंक्षयः | युग–संक्षय (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऊ | चु | श्च | दे | व | दे | वे | शं |
| व | र | दं | प्र | पि | ता | म | हम् |
| क | च्चि | ल्लो | क | क्ष | यो | दे | व |
| प्रा | प्तो | वा | यु | ग | सं | क | यः |