देवानां भाषितं श्रुत्वा शूरो मूर्ध्नि कृताञ्जलिः ।
प्रत्युवाच महाबाहुः शत्रुघ्नः प्रयतात्मवान् ॥
देवानां भाषितं श्रुत्वा शूरो मूर्ध्नि कृताञ्जलिः ।
प्रत्युवाच महाबाहुः शत्रुघ्नः प्रयतात्मवान् ॥
M N Dutt
Hearing the words of the celestials the largearmed and self-controlled Satrughna placed his hands on his head and said.पदच्छेदः
| देवानां | देव (६.३) |
| भाषितं | भाषित (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| शूरो | शूर (१.१) |
| मूर्ध्नि | मूर्धन् (७.१) |
| कृताञ्जलिः | कृताञ्जलि (१.१) |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (√प्रति-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महाबाहुः | महत्–बाहु (१.१) |
| शत्रुघ्नः | शत्रुघ्न (१.१) |
| प्रयतात्मवान् | प्रयत (√प्र-यम् + क्त)–आत्मवत् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | वा | नां | भा | षि | तं | श्रु | त्वा |
| शू | रो | मू | र्ध्नि | कृ | ता | ञ्ज | लिः |
| प्र | त्यु | वा | च | म | हा | बा | हुः |
| श | त्रु | घ्नः | प्र | य | ता | त्म | वान् |