M N Dutt
The kings, O Raghava, are never tired of living in a foreign land. According to the morality of the Kșatriyas, their greatest duty consists in governing the subjects.
पदच्छेदः
| नावसीदन्ति | न (अव्ययः)–अवसीदन्ति (√अव-सद् लट् प्र.पु. बहु.) |
| राजानो | राजन् (१.३) |
| विप्रवासेषु | विप्रवास (७.३) |
| राघव | राघव (८.१) |
| प्रजाश्च | प्रजा (१.३)–च (अव्ययः) |
| परिपाल्या | परिपाल्य (√परि-पालय् + कृत्, १.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| क्षत्रधर्मेण | क्षत्र–धर्म (३.१) |
| राघव | राघव (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ना | व | सी | द | न्ति | रा | जा | नो |
| वि | प्र | वा | से | षु | रा | घ | व |
| प्र | जा | श्च | प | रि | पा | ल्या | हि |
| क्ष | त्र | ध | र्मे | ण | रा | घ | व |