M N Dutt
And for this, the Brāhmaṇas were the highest caste, effulgent in asceticism, asceticism, shorn shorn of ignorance, above death and conversant with three ages.
पदच्छेदः
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| युगे | युग (७.१) |
| प्रज्वलिते | प्रज्वलित (√प्र-ज्वल् + क्त, ७.१) |
| ब्रह्मभूते | ब्रह्मन्–भूत (√भू + क्त, ७.१) |
| अनावृते | अनावृत (७.१) |
| अमृत्यवस्तदा | अमृत्यु (१.३)–तदा (अव्ययः) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| जज्ञिरे | जज्ञिरे (√जन् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| दीर्घदर्शिनः | दीर्घ–दर्शिन् (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्मि | न्यु | गे | प्र | ज्व | लि | ते |
| ब्र | ह्म | भू | ते | अ | ना | वृ | ते |
| अ | मृ | त्य | व | स्त | दा | स | र्वे |
| ज | ज्ञि | रे | दी | र्घ | द | र्शि | नः |