M N Dutt
In the golden age the Brāhmaṇas were more powerful than the Kșatriyas. But in the Tretā age the Brāhmaṇas and the Ksatriyas were equally powerful.
पदच्छेदः
| ब्रह्मक्षत्रं | ब्रह्मन्–क्षत्र (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तत् | तद् (१.१) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| यत् | यद् (१.१) |
| पूर्वम् | पूर्वम् (अव्ययः) |
| अपरं | अपर (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| यत् | यद् (१.१) |
| युगयोर् | युग (६.२) |
| उभयोर् | उभय (६.२) |
| आसीत् | आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| समवीर्यसमन्वितम् | सम–वीर्य–समन्वित (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ब्र | ह्म | क्ष | त्रं | तु | त | त्स | र्वं |
| य | त्पू | र्व | म | प | रं | च | यत् |
| यु | ग | यो | रु | भ | यो | रा | सी |
| त्स | म | वी | र्य | स | म | न्वि | तम् |