M N Dutt
And the second foot of impiety being ushered into the world the Dvāpara age set in.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| पादम् | पाद (२.१) |
| अधर्मस्य | अधर्म (६.१) |
| द्वितीयम् | द्वितीय (२.१) |
| अवतारयत् | अवतारयत् (√अव-तारय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| द्वापरसंख्या | द्वापर–संख्या (१.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| युगस्य | युग (६.१) |
| समजायत | समजायत (√सम्-जन् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | पा | द | म | ध | र्म | स्य |
| द्वि | ती | य | म | व | ता | र | यत् |
| त | तो | द्वा | प | र | सं | ख्या | सा |
| यु | ग | स्य | स | म | जा | य | त |