यो ह्यधर्ममकार्यं वा विषये पार्थिवस्य हि ।
करोति राजशार्दूल पुरे वा दुर्मतिर्नरः ।
क्षिप्रं हि नरकं याति स च राजा न संशयः ॥
यो ह्यधर्ममकार्यं वा विषये पार्थिवस्य हि ।
करोति राजशार्दूल पुरे वा दुर्मतिर्नरः ।
क्षिप्रं हि नरकं याति स च राजा न संशयः ॥
M N Dutt
Calamity sets in that kingdom where a vicious-minded person commits an iniquity and that vicious wight and the king forsooth speedily repair to hell.पदच्छेदः
| यो | यद् (१.१) |
| ह्यधर्मम् | हि (अव्ययः)–अधर्म (२.१) |
| अकार्यं | अकार्य (२.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| विषये | विषय (७.१) |
| पार्थिवस्य | पार्थिव (६.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| करोति | करोति (√कृ लट् प्र.पु. एक.) |
| राजशार्दूल | राजन्–शार्दूल (८.१) |
| पुरे | पुर (७.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| दुर्मतिर् | दुर्मति (१.१) |
| नरः | नर (१.१) |
| क्षिप्रं | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नरकं | नरक (२.१) |
| याति | याति (√या लट् प्र.पु. एक.) |
| स | तद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| संशयः | संशय (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यो | ह्य | ध | र्म | म | का | र्यं | वा | वि | ष | ये | पा |
| र्थि | व | स्य | हि | क | रो | ति | रा | ज | शा | र्दू | ल |
| पु | रे | वा | दु | र्म | ति | र्न | रः | क्षि | प्रं | हि | न |
| र | कं | या | ति | स | च | रा | जा | न | सं | श | यः |