पदच्छेदः
| तेषां | तद् (६.३) |
| समुपविष्टानां | समुपविष्ट (√समुप-विश् + क्त, ६.३) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| दीप्ततेजसाम् | दीप्त (√दीप् + क्त)–तेजस् (६.३) |
| रघवः | रघु (१.३) |
| सर्वम् | सर्व (२.१) |
| आचष्टे | आचष्टे (√आ-चक्ष् लट् प्र.पु. एक.) |
| द्विजो | द्विज (१.१) |
| यस्मात् | यस्मात् (अव्ययः) |
| प्ररोदिति | प्ररोदिति (√प्र-रुद् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | षां | स | मु | प | वि | ष्टा | नां |
| स | र्वे | षां | दी | प्त | ते | ज | साम् |
| रा | घ | वः | स | र्व | मा | च | ष्टे |
| द्वि | जो | य | स्मा | त्प्र | रो | दि | ति |