पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अर्थं | अर्थ (२.१) |
| चिन्तयानो | चिन्तयान (√चिन्तय् + शानच्, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| राघव | राघव (८.१) |
| विष्ठितो | विष्ठित (√वि-स्था + क्त, १.१) |
| ऽस्मि | अस्मि (√अस् लट् उ.पु. ) |
| सरस्तीरे | सरस्–तीर (७.१) |
| किं | क (१.१) |
| न्विदं | नु (अव्ययः)–इदम् (१.१) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| प्रभो | प्रभु (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | र्थं | चि | न्त | या | नो | ऽहं |
| मु | हू | र्तं | त | त्र | रा | घ | व |
| वि | ष्ठि | तो | ऽस्मि | स | र | स्ती | रे |
| किं | न्वि | दं | स्या | दि | ति | प्र | भो |