M N Dutt
Thereat the horses could not keep their ground, and the elephants were reſt of their temporal flow, and shorn of their virtue at the roars of the conch, heroes began to topple down from their cars.
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| शेकुर् | शेकुः (√शक् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| अश्वाः | अश्व (१.३) |
| संस्थातुं | संस्थातुम् (√सम्-स्था + तुमुन्) |
| विमदाः | विमद (१.३) |
| कुञ्जराभवन् | कुञ्जर (१.३)–अभवन् (√भू लङ् प्र.पु. बहु.) |
| स्यन्दनेभ्यश्च्युता | स्यन्दन (५.३)–च्युत (√च्यु + क्त, १.३) |
| योधाः | योध (१.३) |
| शङ्खरावितदुर्बलाः | शङ्ख–रावित–दुर्बल (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | शे | कु | र | श्वाः | सं | स्था | तुं |
| वि | म | दाः | कु | ञ्ज | रा | भ | वन् |
| स्य | न्द | ने | भ्य | श्च्यु | ता | यो | धाः |
| श | ङ्ख | रा | वि | त | दु | र्ब | लाः |