M N Dutt
In that conflict, pierced by the arrows discharged from Nārāyana's arm, the Rākşasa began to drop to the ground like mountains struck with the thunder-bolt.
पदच्छेदः
| भिद्यमानाः | भिद्यमान (√भिद् + शानच्, १.३) |
| शरैश्चान्ये | शर (३.३)–च (अव्ययः)–अन्य (१.३) |
| नारायणधनुश्च्युतैः | नारायण–धनुस्–च्युत (√च्यु + क्त, ३.३) |
| निपेतू | निपेतुः (√नि-पत् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| राक्षसा | राक्षस (१.३) |
| भीमाः | भीम (१.३) |
| शैला | शैल (१.३) |
| वज्रहता | वज्र–हत (√हन् + क्त, १.३) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भि | द्य | मा | नाः | श | रै | श्चा | न्ये |
| ना | रा | य | ण | ध | नु | श्च्यु | तैः |
| नि | पे | तू | रा | क्ष | सा | भी | माः |
| शै | ला | व | ज्र | ह | ता | इ | व |