M N Dutt
Having in this wise advised Ikşvāku Manu delightedly repaired to the region Brahmā.पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| बहु | बहु (२.१) |
| संदिश्य | संदिश्य (√सम्-दिश् + ल्यप्) |
| मनुः | मनु (१.१) |
| पुत्रं | पुत्र (२.१) |
| समाधिना | समाधि (३.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| त्रिदिवं | त्रिदिव (२.१) |
| हृष्टो | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.१) |
| ब्रह्मलोकम् | ब्रह्मन्–लोक (२.१) |
| अनुत्तमम् | अनुत्तम (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | तं | ब | हु | सं | दि | श्य |
| म | नुः | पु | त्रं | स | मा | धि | ना |
| ज | गा | म | त्रि | दि | वं | हृ | ष्टो |
| ब्र | ह्म | लो | क | म | नु | त्त | मम् |