M N Dutt
Having related this story to Rāma the great saint Agastya again said in this context.पदच्छेदः
| एतद् | एतद् (२.१) |
| आख्याय | आख्याय (√आ-ख्या + ल्यप्) |
| रामाय | राम (४.१) |
| महर्षिः | महत्–ऋषि (१.१) |
| कुम्भसंभवः | कुम्भ–सम्भव (१.१) |
| अस्याम् | इदम् (७.१) |
| एवापरं | एव (अव्ययः)–अपर (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| कथायाम् | कथा (७.१) |
| उपचक्रमे | उपचक्रमे (√उप-क्रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | दा | ख्या | य | रा | मा | य |
| म | ह | र्षिः | कु | म्भ | सं | भ | वः |
| अ | स्या | मे | वा | प | रं | वा | क्यं |
| क | था | या | मु | प | च | क्र | मे |