M N Dutt
At that time, Sukra's daughter, matchless in beauty and grace, was walking in the forest. The king saw that jewel of a girl, and being stricken with lust and growing restless he approached her and said.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| तां | तद् (२.१) |
| सुदुर्मेधा | सु (अव्ययः)–दुर्मेधस् (१.१) |
| अनङ्गशरपीडितः | अनङ्ग–शर–पीडित (√पीडय् + क्त, १.१) |
| अभिगम्य | अभिगम्य (√अभि-गम् + ल्यप्) |
| सुसंविग्नः | सु (अव्ययः)–संविग्न (√सम्-विज् + क्त, १.१) |
| कन्यां | कन्या (२.१) |
| वचनम् | वचन (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | दृ | ष्ट्वा | तां | सु | दु | र्मे | धा |
| अ | न | ङ्ग | श | र | पी | डि | तः |
| अ | भि | ग | म्य | सु | सं | वि | ग्नः |
| क | न्यां | व | च | न | म | ब्र | वीत् |