M N Dutt
Hearing the words of the preceptor Sukra, the inmates left the hermitage and lived at a place beyond the limit of Danda's territories.
पदच्छेदः
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| तूशनसो | तु (अव्ययः)–उशनस् (६.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| आश्रमावसथो | आश्रम–आवसथ (१.१) |
| जनः | जन (१.१) |
| निष्क्रान्तो | निष्क्रान्त (√निः-क्रम् + क्त, १.१) |
| विषयात् | विषय (५.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| स्थानं | स्थान (२.१) |
| चक्रे | चक्रे (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| ऽथ | अथ (अव्ययः) |
| बाह्यतः | बाह्यतस् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ |
|---|
| श्रु | त्वा | तू | श | स | नो | वा | क्यं |
| स | आ | श्र | मा | व | स | थो | ज | नः |
| नि | ष्क्रा | न्तो | वि | ष | या | त्त | स्य |
| स्था | नं | च | क्रे | ऽथ | बा | ह्य | तः |