पदच्छेदः
| प्रजानां | प्रजा (६.३) |
| पालनं | पालन (१.१) |
| धर्मो | धर्म (१.१) |
| राज्ञां | राजन् (६.३) |
| यज्ञेन | यज्ञ (३.१) |
| संमितः | संमित (√सम्-मा + क्त, १.१) |
| तस्माच्छृणोमि | तस्मात् (अव्ययः)–शृणोमि (√श्रु लट् उ.पु. ) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| साधूक्तं | साधु (२.१)–उक्त (√वच् + क्त, २.१) |
| सुसमाहितम् | सु (अव्ययः)–समाहित (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | जा | नां | पा | ल | नं | ध | र्मो |
| रा | ज्ञां | य | ज्ञे | न | सं | मि | तः |
| त | स्मा | च्छृ | णो | मि | ते | वा | क्यं |
| सा | धू | क्तं | सु | स | मा | हि | तम् |