M N Dutt
While they were thus thinking, Indra, of thousand eyes, taking up a thunderbolt, hurled it against Vrtra's head.
पदच्छेदः
| तेषां | तद् (६.३) |
| चिन्तयतां | चिन्तयत् (√चिन्तय् + शतृ, ६.३) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| सहस्राक्षः | सहस्राक्ष (१.१) |
| पुरंदरः | पुरंदर (१.१) |
| वज्रं | वज्र (१.१) |
| प्रगृह्य | प्रगृह्य (√प्र-ग्रह् + ल्यप्) |
| बाहुभ्यां | बाहु (३.२) |
| प्राहिणोद् | प्राहिणोत् (√प्र-हि लङ् प्र.पु. एक.) |
| वृत्रमूर्धनि | वृत्र–मूर्धन् (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षां | चि | न्त | य | तां | त | त्र |
| स | ह | स्रा | क्षः | पु | रं | द | रः |
| व | ज्रं | प्र | गृ | ह्य | बा | हु | भ्यां |
| प्र | हि | णो | द्वृ | त्र | मू | र्ध | नि |