पदच्छेदः
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| गतिः | गति (१.१) |
| परमा | परम (१.१) |
| देव | देव (८.१) |
| पूर्वजो | पूर्वज (१.१) |
| जगतः | जगन्त् (६.१) |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) |
| रक्षार्थं | रक्षा–अर्थ (२.१)–रक्षा–अर्थ (२.१) |
| सर्वभूतानां | सर्व–भूत (६.३)–सर्व–भूत (६.३) |
| विष्णुत्वम् | विष्णु–त्व (२.१)–विष्णु–त्व (२.१) |
| उपजग्मिवान् | उपजग्मिवत् (√उप-गम् + , १.१)–उपजग्मिवत् (√उप-गम् + , १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वं | ग | तिः | प | र | मा | दे | व |
| पू | र्व | जो | ज | ग | तः | प्र | भुः |
| र | था | र्थं | स | र्व | भू | ता | नां |
| वि | ष्णु | त्व | मु | प | ज | ग्मि | वान् |