पदच्छेदः
| हतश्चायं | हत (√हन् + क्त, १.१)–च (अव्ययः)–इदम् (१.१) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| वृत्रो | वृत्र (१.१) |
| ब्रह्महत्या | ब्रह्महत्या (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वासवम् | वासव (२.१) |
| बाधते | बाधते (√बाध् लट् प्र.पु. एक.) |
| सुरशार्दूल | सुर–शार्दूल (८.१) |
| मोक्षं | मोक्ष (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| विनिर्दिश | विनिर्दिश (√विनिः-दिश् लोट् म.पु. ) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | त | श्चा | यं | त्व | या | वृ | त्रो |
| ब्र | ह्म | ह | त्या | च | वा | स | वम् |
| बा | ध | ते | सु | र | शा | र्दू | ल |
| मो | क्षं | त | स्य | वि | नि | र्दि | श |