पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| दुःखं | दुःख (१.१) |
| महत् | महत् (१.१) |
| त्वासीद् | तु (अव्ययः)–आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| दृष्ट्वात्मानं | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा)–आत्मन् (२.१) |
| तथागतम् | तथागत (२.१) |
| उमापतेश्च | उमापति (६.१)–च (अव्ययः) |
| तत् | तद् (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| ज्ञात्वा | ज्ञात्वा (√ज्ञा + क्त्वा) |
| त्रासम् | त्रास (२.१) |
| उपागमत् | उपागमत् (√उप-गम् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | दुः | खं | म | ह | त्त्वा | सी |
| द्दृ | ष्ट्वा | त्मा | नं | त | था | ग | तम् |
| उ | मा | प | ते | श्च | त | त्क | र्म |
| ज्ञा | त्वा | त्रा | स | मु | पा | ग | मत् |