M N Dutt
I shall give you always fruits and roots. O you females, you shall have all Kimpuruşas as your husbands.पदच्छेदः
| मूलपत्रफलैः | मूल–पत्त्र–फल (३.३) |
| सर्वा | सर्व (१.३) |
| वर्तयिष्यथ | वर्तयिष्यथ (√वर्तय् लृट् म.पु. द्वि.) |
| नित्यदा | नित्यदा (अव्ययः) |
| स्त्रियः | स्त्री (१.३) |
| किम्पुरुषान्नाम | किम्पुरुष (२.३)–नाम (अव्ययः) |
| भर्तॄन् | भर्तृ (२.३) |
| समुपलप्स्यथ | समुपलप्स्यथ (√समुप-लभ् लृट् म.पु. द्वि.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मू | ल | पु | त्र | फ | लैः | स | र्वा |
| व | र्त | यि | ष्य | थ | नि | त्य | दा |
| स्त्रि | यः | कि | म्पु | रु | षा | न्ना | म |
| भ | र्तॄ | न्स | मु | प | ल | प्स्य | थ |