पदच्छेदः
| सा | तद् (१.१) |
| तस्योरसि | तद् (६.१)–उरस् (७.१) |
| विस्तीर्णे | विस्तीर्ण (√वि-स्तृ + क्त, ७.१) |
| हारभासावभासिते | हार–भास–अवभासित (√अव-भासय् + क्त, ७.१) |
| अपतद् | अपतत् (√पत् लङ् प्र.पु. एक.) |
| राक्षसेन्द्रस्य | राक्षस–इन्द्र (६.१) |
| गिरिकूट | गिरि–कूट (७.१) |
| इवाशनिः | इव (अव्ययः)–अशनि (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | त | स्यो | र | सि | वि | स्ती | र्णे |
| हा | र | भा | सा | व | भा | सि | ते |
| अ | प | त | द्रा | क्ष | से | न्द्र | स्य |
| गि | रि | कू | ट | इ | वा | श | निः |