पदच्छेदः
| संवर्तस्य | संवर्त (६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| राजर्षिः | राजर्षि (१.१) |
| शिष्यः | शिष्य (१.१) |
| परपुरंजयः | पर–पुरंजय (१.१) |
| मरुत्त | मरुत्त (१.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| विख्यतस्तं | विख्यत् (√वि-ख्या + शतृ, १.३)–तद् (२.१) |
| यज्ञं | यज्ञ (२.१) |
| समुपाहरत् | समुपाहरत् (√समुपा-हृ लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | व | र्त | स्य | तु | रा | ज | र्षिः |
| शि | ष्यः | प | र | पु | रं | ज | यः |
| म | रु | त्त | इ | ति | वि | ख्या | त |
| स्तं | य | ज्ञं | स | मु | पा | ह | रत् |