पदच्छेदः
| एतान् | एतद् (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| समानीय | समानीय (√समा-नी + ल्यप्) |
| वाक्यज्ञस्तत्त्वदर्शिनः | वाक्य–ज्ञ (१.१)–तत्त्व–दर्शिन् (२.३) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| सुहृदो | सुहृद् (२.३) |
| धैर्येण | धैर्य (३.१) |
| सुसमाहितः | सु (अव्ययः)–समाहित (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ता | न्स | र्वा | न्स | मा | नी | य |
| वा | क्य | ज्ञ | स्त | त्त्व | द | र्शि | नः |
| उ | वा | च | स | र्वा | न्सु | हृ | दो |
| धै | र्ये | ण | सु | स | मा | हि | तः |