M N Dutt
After the great Rșis Vālmīki had said this, Rāma, on beholding the daughter of Janaka resembling a celestial, in the midst of the assembly, with folded hands, said.
पदच्छेदः
| वाल्मीकिनैवम् | वाल्मीकि (३.१)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस्तु | उक्त (√वच् + क्त, १.१)–तु (अव्ययः) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| प्रत्यभाषत | प्रत्यभाषत (√प्रति-भाष् लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| जगतो | जगन्त् (६.१) |
| मध्ये | मध्य (७.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| तां | तद् (२.१) |
| देववर्णिनीम् | देव–वर्णिन् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वा | ल्मी | कि | नै | व | मु | क्त | स्तु |
| रा | घ | वः | प्र | त्य | भा | ष | त |
| प्रा | ञ्ज | लि | र्ज | ग | तो | म | ध्ये |
| दृ | ष्ट्वा | तां | दे | व | व | र्णि | नीम् |