प्रत्ययो हि पुरा दत्तो वैदेह्या सुरसंनिधौ ।
सेयं लोकभयाद्ब्रह्मन्नपापेत्यभिजानता ।
परित्यक्ता मया सीता तद्भवान्क्षन्तुमर्हति ॥
प्रत्ययो हि पुरा दत्तो वैदेह्या सुरसंनिधौ ।
सेयं लोकभयाद्ब्रह्मन्नपापेत्यभिजानता ।
परित्यक्ता मया सीता तद्भवान्क्षन्तुमर्हति ॥
M N Dutt
O Brāhmaṇa, vilification of the people is very powerful. Although I know that Jānaki has not been touched by any sin still I have renounced her. Do you therefore forgive me.पदच्छेदः
| प्रत्ययो | प्रत्यय (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| पुरा | पुरा (अव्ययः) |
| दत्तो | दत्त (√दा + क्त, १.१) |
| वैदेह्या | वैदेही (३.१) |
| सुरसंनिधौ | सुर–संनिधि (७.१) |
| सेयं | तद् (१.१)–इदम् (१.१) |
| लोकभयाद् | लोक–भय (५.१) |
| ब्रह्मन्न् | ब्रह्मन् (८.१) |
| अपापेत्यभिजानता | अपाप (१.१)–इति (अव्ययः)–अभिजानत् (√अभि-ज्ञा + शतृ, ३.१) |
| परित्यक्ता | परित्यक्त (√परि-त्यज् + क्त, १.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| तद् | तद् (२.१) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| क्षन्तुम् | क्षन्तुम् (√क्षम् + तुमुन्) |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | त्य | यो | हि | पु | रा | द | त्तो | वै | दे | ह्या | सु |
| र | सं | नि | धौ | से | यं | लो | क | भ | या | द्ब्र | ह्म |
| न्न | पा | पे | त्य | भि | जा | न | ता | प | रि | त्य | क्ता |
| म | या | सी | ता | त | द्भ | वा | न्क्ष | न्तु | म | र्ह | ति |