पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| विसृज्य | विसृज्य (√वि-सृज् + ल्यप्) |
| तान् | तद् (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| रामो | राम (१.१) |
| राजीवलोचनः | राजीव–लोचन (१.१) |
| हृदि | हृद् (७.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| सीताम् | सीता (२.१) |
| अयोध्यां | अयोध्या (२.१) |
| प्रविवेश | प्रविवेश (√प्र-विश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सः | तद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | वि | सृ | ज्य | ता | न्स | र्वा |
| न्रा | मो | रा | जी | व | लो | च | नः |
| हृ | दि | कृ | त्वा | त | दा | सी | ता |
| म | यो | ध्यां | प्र | वि | वे | श | सः |