M N Dutt
O son, behold your brother, Vaisravana, enfolded in effulgence; and, albeit of equal fraternity, behold you in this plight!
पदच्छेदः
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| वैश्रवणं | वैश्रवण (२.१) |
| पश्य | पश्य (√पश् लोट् म.पु. ) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| तेजसा | तेजस् (३.१) |
| वृतम् | वृत (√वृ + क्त, २.१) |
| भ्रातृभावे | भ्रातृ–भाव (७.१) |
| समे | सम (७.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| पश्यात्मानं | पश्य (√पश् लोट् म.पु. )–आत्मन् (२.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| ईदृशम् | ईदृश (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पु | त्र | वै | श्र | व | णं | प | श्य |
| भ्रा | त | रं | ते | ज | सा | वृ | तम् |
| भ्रा | तृ | भा | वे | स | मे | चा | पि |
| प | श्या | त्मा | नं | त्व | मी | दृ | शम् |