M N Dutt
Hearing the words of the maternal uncle communicated by the great saint, Rāma, with delight, said.
पदच्छेदः
| तच्छ्रुत्वा | तद् (२.१)–श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| प्रीतो | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| महर्षेर्मातुलस्य | महत्–ऋषि (६.१)–मातुल (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| बाढम् | बाढ (२.१) |
| इत्येवं | इति (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| भरतं | भरत (२.१) |
| चान्ववैक्षत | च (अव्ययः)–अन्ववैक्षत (√अन्वव-ईक्ष् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | च्छ्रु | त्वा | रा | घ | वः | प्री | तो |
| म | ह | र्षे | र्मा | तु | ल | स्य | च |
| उ | वा | च | बा | ढ | मि | त्ये | वं |
| भ | र | तं | चा | न्व | वै | क्ष | त |