पदच्छेदः
| अङ्गदं | अङ्गद (२.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| सौमित्रिर् | सौमित्रि (१.१) |
| लक्ष्मणो | लक्ष्मण (१.१) |
| ऽनुजगाम | अनुजगाम (√अनु-गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
| चन्द्रकेतोस्तु | चन्द्रकेतु (६.१)–तु (अव्ययः) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| पार्ष्णिग्राहो | पार्ष्णिग्राह (१.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ङ्ग | दं | चा | पि | सौ | मि | त्रि |
| र्ल | क्ष्म | णो | ऽनु | ज | गा | म | ह |
| च | न्द्र | के | तो | स्तु | भ | र | तः |
| पा | र्ष्णि | ग्रा | हो | ब | भू | व | ह |