M N Dutt
And Bharata, according to his desire, having spent more than a year in the city of Candrakāntă, came back to Ayodhyā and saluted Rama's feet.
पदच्छेदः
| भरतो | भरत (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| तथैवोष्य | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–उष्य (√वस् + क्त्वा) |
| संवत्सरम् | संवत्सर (२.१) |
| अथाधिकम् | अथ (अव्ययः)–अधिक (२.१) |
| अयोध्यां | अयोध्या (२.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| अगम्य | अगम्य (८.१) |
| रामपादावुपागमत् | राम–पाद (२.२)–उपागमत् (√उप-गम् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भ | र | तो | ऽपि | त | थै | वो | ष्य |
| सं | व | त्स | र | म | था | धि | कम् |
| अ | यो | ध्यां | पु | न | रा | ग | म्य |
| रा | म | पा | दा | वु | पा | ग | मत् |