पदच्छेदः
| सो | तद् (१.१) |
| ऽब्रवील्लक्ष्मणं | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.)–लक्ष्मण (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| धृतिमन्तं | धृतिमत् (२.१) |
| यशस्विनम् | यशस्विन् (२.१) |
| मां | मद् (२.१) |
| निवेदय | निवेदय (√नि-वेदय् लोट् म.पु. ) |
| रामाय | राम (४.१) |
| सम्प्राप्तं | सम्प्राप्त (√सम्प्र-आप् + क्त, २.१) |
| कार्यगौरवात् | कार्य–गौरव (५.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सो | ऽब्र | वी | ल्ल | क्ष्म | णं | वा | क्यं |
| धृ | ति | म | न्तं | य | श | स्वि | नम् |
| मां | नि | वे | द | य | रा | मा | य |
| सं | प्रा | प्तं | का | र्य | गौ | र | वात् |