M N Dutt
And having approached Rama the foremost? of Raghus, the ascetic, burning in his own energy, said to him, in sweet accents:-० great king may prosperity crown you.
पदच्छेदः
| सो | तद् (१.१) |
| ऽभिगम्य | अभिगम्य (√अभि-गम् + ल्यप्) |
| रघुश्रेष्ठं | रघु–श्रेष्ठ (२.१) |
| दीप्यमानं | दीप्यमान (√दीप् + शानच्, २.१) |
| स्वतेजसा | स्व–तेजस् (३.१) |
| ऋषिर् | ऋषि (१.१) |
| मधुरया | मधुर (३.१) |
| वाचा | वाच् (३.१) |
| वर्धस्वेत्याह | वर्धस्व (√वृध् लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः)–आह (√अह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सो | ऽभि | ग | म्य | र | घु | श्रे | ष्ठं |
| दी | प्य | मा | नं | स्व | ते | ज | सा |
| ऋ | षि | र्म | धु | र | या | वा | चा |
| व | र्ध | स्वे | त्या | ह | रा | घ | वम् |