पदच्छेदः
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| तयोः | तद् (६.२) |
| कथयतोर् | कथयत् (√कथय् + शतृ, ६.२) |
| दुर्वासा | दुर्वासस् (१.१) |
| भगवान् | भगवत् (१.१) |
| ऋषिः | ऋषि (१.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| दर्शनाकाङ्क्षी | दर्शन–आकाङ्क्षिन् (१.१) |
| राजद्वारम् | राजन्–द्वार (२.१) |
| उपागमत् | उपागमत् (√उपा-गम् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | था | त | योः | क | थ | य | तो |
| र्दु | र्वा | सा | भ | ग | वा | नृ | षिः |
| रा | म | स्य | द | र्श | ना | का | ङ्क्षी |
| रा | ज | द्वा | र | मु | पा | ग | मत् |