M N Dutt
There upon beholding Lakşmaņa, the fourth portion of Vişnu arrived at their city the celestials were greatly delighted and engaged in his worship.
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| विष्णोश्चतुर्भागम् | विष्णु (६.१)–चतुर्भाग (२.१) |
| आगतं | आगत (√आ-गम् + क्त, २.१) |
| सुरसत्तमाः | सुर–सत्तम (१.३) |
| हृष्टाः | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.३) |
| प्रमुदिताः | प्रमुदित (√प्र-मुद् + क्त, १.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| ऽपूजयन् | अपूजयन् (√पूजय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| ऋषिभिः | ऋषि (३.३) |
| सह | सह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | वि | ष्णो | श्च | तु | र्भा | ग |
| मा | ग | तं | सु | र | स | त्त | माः |
| हृ | ष्टाः | प्र | मु | दि | ताः | स | र्वे |
| ऽपू | ज | य | नृ | षि | भिः | स | ह |