त्यजैनं बलवान्कालो मा प्रतिज्ञां वृथा कृथाः ।
विनष्टायां प्रतिज्ञायां धर्मो हि विलयं व्रजेत् ॥
त्यजैनं बलवान्कालो मा प्रतिज्ञां वृथा कृथाः ।
विनष्टायां प्रतिज्ञायां धर्मो हि विलयं व्रजेत् ॥
M N Dutt
Time is powerful; do not falsify your promise. Promise not carried out brings on the destruction of virtue.पदच्छेदः
| त्यजैनं | त्यज (√त्यज् लोट् म.पु. )–एनद् (२.१) |
| बलवान् | बलवत् (१.१) |
| कालो | काल (१.१) |
| मा | मा (अव्ययः) |
| प्रतिज्ञां | प्रतिज्ञा (२.१) |
| वृथा | वृथा (अव्ययः) |
| कृथाः | कृथाः (√कृ म.पु. ) |
| विनष्टायां | विनष्ट (√वि-नश् + क्त, ७.१) |
| प्रतिज्ञायां | प्रतिज्ञा (७.१) |
| धर्मो | धर्म (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| विलयं | विलय (२.१) |
| व्रजेत् | व्रजेत् (√व्रज् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्य | जै | नं | ब | ल | वा | न्का | लो |
| मा | प्र | ति | ज्ञां | वृ | था | कृ | थाः |
| वि | न | ष्टा | यां | प्र | ति | ज्ञा | यां |
| ध | र्मो | हि | वि | ल | यं | व्र | जेत् |