अन्वयः
सः भरतत्तु as for Bharata, त्रस्तगात्रः limbs trembling, कृताञ्जलिः with palms folded (in reverence), सज्जमानया got ready, वाचा words, पुनः again, राघवम् to Rama, इदं वाक्यम् these word, अब्रवीत् said.
Summary
Before Bharata, with his limbs trembling and with palms folded (in reverence) was ready to depart, he said to Rama:
पदच्छेदः
| स्रस्तगात्रस् | स्रस्त (√स्रंस् + क्त)–गात्र (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| भरतः | भरत (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| वाचा | वाच् (३.१) |
| सज्जमानया | सज्जमान (√सञ्ज् + शानच्, ३.१) |
| कृताञ्जलिर् | कृत (√कृ + क्त)–अञ्जलि (१.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| राघवं | राघव (२.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्र | स्त | गा | त्र | स्तु | भ | र | तः |
| स | वा | चा | स | ज्ज | मा | न | या |
| कृ | ता | ञ्ज | लि | रि | दं | वा | क्यं |
| रा | घ | वं | पु | न | र | ब्र | वीत् |