अन्वयः
अथ then, जरया in old age, वृद्धः grown old, तपसा च also in austerities, जराम् old age, गतः attained, ऋषिः ascetic, वेपमान इव as though trembling, भूतदयापरम् compassionate to all beings, रामम् to Rama, उवाच said.
Summary
Hearing those words, an ascetic old in age and austerities, as though trembling said to Rama who is compassionate to all beings:
पदच्छेदः
| अथर्षिर् | अथ (अव्ययः)–ऋषि (१.१) |
| जरया | जरा (३.१) |
| वृद्धस् | वृद्ध (१.१) |
| तपसा | तपस् (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| जरां | जरा (२.१) |
| गतः | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| वेपमान | वेपमान (√विप् + शानच्, १.१) |
| इवोवाच | इव (अव्ययः)–उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामं | राम (२.१) |
| भूतदयापरम् | भूत–दया–पर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | थ | र्षि | र्ज | र | या | वृ | द्ध |
| स्त | प | सा | च | ज | रां | ग | तः |
| वे | प | मा | न | इ | वो | वा | च |
| रा | मं | भू | त | द | या | प | रम् |