राम वृद्धोऽस्मि दीर्घायुर्भुक्ता भोगा मयेप्सिताः ।
अन्नवद्भिः क्रतुशतैस्तथेष्टं भूरिदक्षिणैः ॥
राम वृद्धोऽस्मि दीर्घायुर्भुक्ता भोगा मयेप्सिताः ।
अन्नवद्भिः क्रतुशतैस्तथेष्टं भूरिदक्षिणैः ॥
अन्वयः
राम O Rama, दीर्घायुः one with long life, वृद्धः अस्मि I have become old, मया by me, ईप्सिताः desires, भोगाः pleasures, भुक्ताः enjoyed, अन्नवद्भिः cooked rice, भूरिदक्षिणैः abundance of donations, क्रतुशतैः by hundreds of rituals, इष्टम् is performed.Summary
O Rama after a long life I have grown old. I have enjoyed all the pleasures I desired. I have also performed hundreds of rituals which enjoined distribution of abundant food and gifts.पदच्छेदः
| राम | राम (८.१) |
| वृद्धो | वृद्ध (१.१) |
| ऽस्मि | अस्मि (√अस् लट् उ.पु. ) |
| दीर्घायुर् | दीर्घ–आयुस् (१.१) |
| भुक्ता | भुक्त (√भुज् + क्त, १.३) |
| भोगा | भोग (१.३) |
| मयेप्सिताः | मद् (३.१)–ईप्सित (१.३) |
| अन्नवद्भिः | अन्नवत् (३.३) |
| क्रतुशतैस् | क्रतु–शत (३.३) |
| तथेष्टं | तथा (अव्ययः)–इष्ट (√यज् + क्त, १.१) |
| भूरिदक्षिणैः | भूरि–दक्षिणा (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | म | वृ | द्धो | ऽस्मि | दी | र्घा | यु |
| र्भु | क्ता | भो | गा | म | ये | प्सि | ताः |
| अ | न्न | व | द्भिः | क्र | तु | श | तै |
| स्त | थे | ष्टं | भू | रि | द | क्षि | णैः |