मनश्च मे दीनमिहाप्रहृष्टं; चक्षुश्च सव्यं कुरुते विकारम् ।
असंशयं लक्ष्मण नास्ति सीता; हृता मृता वा पथि वर्तते वा ॥
मनश्च मे दीनमिहाप्रहृष्टं; चक्षुश्च सव्यं कुरुते विकारम् ।
असंशयं लक्ष्मण नास्ति सीता; हृता मृता वा पथि वर्तते वा ॥
अन्वयः
इह here, दीनम् depressed, मे मनश्च my heart, अप्रहृष्टम् sorrowful, सव्यं चक्षुश्च left eye, विकारम् throbbing, कुरुते doing, लक्ष्मण Lakshmana, असंशयम् no doubt, सीता Sita, नास्ति is not alive, हृता either abducted, मृता वा or died, पथि on the way, वर्तते वा lies.M N Dutt
Yet my mind is poor and cheerless; and my left eye throbs. Doubtless, O Laksmana, Sita is not, she is either carried away, or dead, or is wandering on the way. SECITION ५८Summary
With my heart dejected and depressed, my left eye throbbing, O Lakshmana, I have no doubt that Sita is either abducted or dead or abandoned on the way.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे सप्तपञ्चाशस्सर्गः॥Thus ends the fiftyseventh sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| मनश् | मनस् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| दीनम् | दीन (१.१) |
| इहाप्रहृष्टं | इह (अव्ययः)–अप्रहृष्ट (१.१) |
| चक्षुश् | चक्षुस् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सव्यं | सव्य (१.१) |
| कुरुते | कुरुते (√कृ लट् प्र.पु. एक.) |
| विकारम् | विकार (२.१) |
| असंशयं | असंशय (२.१) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| सीता | सीता (१.१) |
| हृता | हृत (√हृ + क्त, १.१) |
| मृता | मृत (√मृ + क्त, १.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| पथि | पथिन् (७.१) |
| वर्तते | वर्तते (√वृत् लट् प्र.पु. एक.) |
| वा | वा (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न | श्च | मे | दी | न | मि | हा | प्र | हृ | ष्टं |
| च | क्षु | श्च | स | व्यं | कु | रु | ते | वि | का | रम् |
| अ | सं | श | यं | ल | क्ष्म | ण | ना | स्ति | सी | ता |
| हृ | ता | मृ | ता | वा | प | थि | व | र्त | ते | वा |