अन्वयः
राघवस्य Rama's, कार्यं च work also, ते to you, अविशङ्कया without hesitation, कर्तव्यम् duty, अकरणे not do, अधर्मः unrighteousness, स्यात् हि will be, अमानितः disobeyed, त्वाम् you, हिंस्यात् च will hurt.
M N Dutt
It behoveth you to perform Rāghava's service fearlessly or else you shall be visited with sin: on his being insulted you shall be injured.
Summary
'You ought to carry out Rama's work without hesitation. If you do not, it will be unrighteous and harmful.
पदच्छेदः
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| कार्यं | कार्य (१.१) |
| कर्तव्यम् | कर्तव्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| अविशङ्कया | अविशङ्का (३.१) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| अधर्मो | अधर्म (१.१) |
| ह्य् | हि (अव्ययः) |
| अकरणे | अकरण (७.१) |
| त्वां | त्वद् (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| हिंस्याद् | हिंस्यात् (√हिंस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| विमानितः | विमानित (√वि-मानय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | घ | व | स्य | च | ते | का | र्यं |
| क | र्त | व्य | म | वि | श | ङ्क | या |
| स्या | द | ध | र्मो | ह्य | क | र | णे |
| त्वां | च | हिं | स्या | द्वि | मा | नि | तः |