कार्तिके समनुप्राप्ते त्वं रावणवधे यत ।
एष नः समयः सौम्य प्रविश त्वं स्वमालयम् ।
अभिषिञ्चस्व राज्ये च सुहृदः संप्रहर्षय ॥
कार्तिके समनुप्राप्ते त्वं रावणवधे यत ।
एष नः समयः सौम्य प्रविश त्वं स्वमालयम् ।
अभिषिञ्चस्व राज्ये च सुहृदः संप्रहर्षय ॥
अन्वयः
कार्तिके when Kartika, समनुप्राप्ते sets in, त्वम् you, रावणवधे for the slaying of Ravana, यत you try, सौम्य O good Sugriva, एषः this, नः for us, समयः proper time, त्वम् you, स्वम् your, आलयम् city, प्रविश enter, राज्ये in the kingdom, अभिषिक्तस्व on installing yourself, सुहृदः to your friends, सम्प्रहर्षय cheer them .M N Dutt
You shall engage in endeavours to bring about the destruction of Rāvana, after Kārtika sets in. This is not the proper time, O gentle one, and do you enter your own city. And being installed on the throne do you enhance the joy of your friends.Summary
'Enter the city and get yourself installed and cheer your friends. Make all arrangement for killing Ravana when the month of Kartika begins as it is the proper time (for the purpose).पदच्छेदः
| कार्त्तिके | कार्त्तिक (७.१) |
| समनुप्राप्ते | समनुप्राप्त (√समनुप्र-आप् + क्त, ७.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| रावणवधे | रावण–वध (७.१) |
| यत | यत (√यत् लोट् म.पु. ) |
| एष | एतद् (१.१) |
| नः | मद् (६.३) |
| समयः | समय (१.१) |
| सौम्य | सौम्य (८.१) |
| प्रविश | प्रविश (√प्र-विश् लोट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| स्वम् | स्व (२.१) |
| आलयम् | आलय (२.१) |
| अभिषिञ्चस्व | अभिषिञ्चस्व (√अभि-सिच् लोट् म.पु. ) |
| राज्ये | राज्य (७.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुहृदः | सुहृद् (२.३) |
| संप्रहर्षय | संप्रहर्षय (√संप्र-हर्षय् लोट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | र्ति | के | स | म | नु | प्रा | प्ते | त्वं | रा | व | ण |
| व | धे | य | त | ए | ष | नः | स | म | यः | सौ | म्य |
| प्र | वि | श | त्वं | स्व | मा | ल | यम् | अ | भि | षि | ञ्च |
| स्व | रा | ज्ये | च | सु | हृ | दः | सं | प्र | ह | र्ष | य |