स तत्प्रकर्षन्हरिणां बलं मह;द्बभूव वीरः पवनात्मजः कपि ।
गताम्बुदे व्योम्नि विशुद्धमण्डलः; शशीव नक्षत्रगणोपशोभितः ॥
स तत्प्रकर्षन्हरिणां बलं मह;द्बभूव वीरः पवनात्मजः कपि ।
गताम्बुदे व्योम्नि विशुद्धमण्डलः; शशीव नक्षत्रगणोपशोभितः ॥
अन्वयः
हरीणाम् of monkeys, महत् great, तत् बलम् that army, प्रकर्षन् being foremost among them, वीरः hero, पवनात्मजः son of the Windgod, सः कपिः that monkey, गताम्बुदे cloudless, व्योम्नि in the sky, नक्षत्रगणोपशोभितः adorned by hosts of stars, शशीव like the Moon, बभूव appeared.M N Dutt
Then taking with him that mighty host of monkeys, that hero, the son of the wind, resembled the moon of bright disc in the sky, garnished by the stars, after the clouds have departed.Summary
Like the moon adorned by hosts of stars in the cloudless sky, the mighty heroic Hanuman, the great son of the Windgod, shone in the midst of the army of monkeys.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| प्रकर्षन् | प्रकर्षत् (√प्र-कृष् + शतृ, १.१) |
| हरिणां | हरिन् (६.३) |
| बलं | बल (२.१) |
| महद् | महत् (२.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| वीरः | वीर (१.१) |
| पवनात्मजः | पवनात्मज (१.१) |
| कपिः | कपि (१.१) |
| गताम्बुदे | गत (√गम् + क्त)–अम्बुद (७.१) |
| व्योम्नि | व्योमन् (७.१) |
| विशुद्धमण्डलः | विशुद्ध (√वि-शुध् + क्त)–मण्डल (१.१) |
| शशीव | शशिन् (१.१)–इव (अव्ययः) |
| नक्षत्रगणोपशोभितः | नक्षत्र–गण–उपशोभित (√उप-शोभय् + क्त, १.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त | त्प्र | क | र्ष | न्ह | रि | णां | ब | लं | म | ह |
| द्ब | भू | व | वी | रः | प | व | ना | त्म | जः | क | पि |
| ग | ता | म्बु | दे | व्यो | म्नि | वि | शु | द्ध | म | ण्ड | लः |
| श | शी | व | न | क्ष | त्र | ग | णो | प | शो | भि | तः |
| ज | त | ज | र | ||||||||