एतत्तु वचनं श्रुत्वा सुग्रीवस्य सुभाषितम् ।
संप्रहृष्टमना हस्तं पीडयामास पाणिना ।
हृद्यं सौहृदमालम्ब्य पर्यष्वजत पीडितम् ॥
एतत्तु वचनं श्रुत्वा सुग्रीवस्य सुभाषितम् ।
संप्रहृष्टमना हस्तं पीडयामास पाणिना ।
हृद्यं सौहृदमालम्ब्य पर्यष्वजत पीडितम् ॥
अन्वयः
सुग्रीवेण(सुग्रीवस्य) Sugriva's, सुभाषितम् wellsaid,एतत् this,वचनम् word,श्रुत्वा having heard, सम्प्रहृष्टमनाः became very happy, पाणिना with the hand, हस्तम् hand, पीडयामास pressed, सौहृदम् affectionately, आलम्ब्य maintaining, हृद्यं delighted , पीडितम् getting close, पर्यष्वजत firmly huggedM N Dutt
Hearing these sweet words of Sugrīva, (Rāma) exceedingly delighted, pressed Sugrīva's hand with his. And contracting friendship with Surgrīva, Rāma experiencing great joy embraced him warmly.Summary
Rama became very happy to hear Sugriva's warm words and pressed his hand with his. Delighted, he went close to Sugriva and hugged him tightly and affectionately.पदच्छेदः
| एतत् | एतद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| सुग्रीवस्य | सुग्रीव (६.१) |
| सुभाषितम् | सु (अव्ययः)–भाषित (√भाष् + क्त, २.१) |
| सम्प्रहृष्टमना | सम्प्रहृष्ट (√सम्प्र-हृष् + क्त)–मनस् (१.१) |
| हस्तं | हस्त (२.१) |
| पीडयामास | पीडयामास (√पीडय् प्र.पु. एक.) |
| पाणिना | पाणि (३.१) |
| हृद्यं | हृद्य (२.१) |
| सौहृदम् | सौहृद (२.१) |
| आलम्ब्य | आलम्ब्य (√आ-लम्ब् + ल्यप्) |
| पर्यष्वजत | पर्यष्वजत (√परि-स्वज् लङ् प्र.पु. एक.) |
| पीडितम् | पीडित (√पीडय् + क्त, २.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | त्तु | व | च | नं | श्रु | त्वा | सु | ग्री | व | स्य |
| सु | भा | षि | तम् | सं | प्र | हृ | ष्ट | म | ना | ह | स्तं |
| पी | ड | या | मा | स | पा | णि | ना | हृ | द्यं | सौ | हृ |
| द | मा | ल | म्ब्य | प | र्य | ष्व | ज | त | पी | डि | तम् |