स तस्य मध्ये भवनस्य वानरो; लतागृहांश्चित्रगृहान्निशागृहान् ।
जगाम सीतां प्रति दर्शनोत्सुको; न चैव तां पश्यति चारुदर्शनाम् ॥
स तस्य मध्ये भवनस्य वानरो; लतागृहांश्चित्रगृहान्निशागृहान् ।
जगाम सीतां प्रति दर्शनोत्सुको; न चैव तां पश्यति चारुदर्शनाम् ॥
अन्वयः
सः मारुतिः Maruti, तस्य of that, भवनस्य mansion's, मध्ये midst, सीतां प्रति towards Sita, दर्शनोत्सुकः with eagerness to find, लतागृहान् homes of creepers, चित्रगृहान् picture galleries, निशागृहान् dormitories for rest at night, जगाम went, चारुदर्शनाम् beautiful lady, ताम् that Sita, न चैव पश्यति did not find her.M N Dutt
Remaining in that mansion, (Hanuman) desirous of getting a sight of Sītā graced with a fair presence, went into bowers, and picture galleries, and night-houses;* but her he did not find. *Intended for stay at night.Summary
Anxious to find Sita, Hanuman revisited the bowers of creepers, picture galleries and domitories located in the midst of the mansion, but did not find that beautiful Sita.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| मध्ये | मध्य (७.१) |
| भवनस्य | भवन (६.१) |
| वानरो | वानर (१.१) |
| लतागृहांश्चित्रगृहान्निशागृहान् | लता–गृह (२.३)–चित्रगृह (२.३)–निशा–गृह (२.३) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
| दर्शनोत्सुको | दर्शन–उत्सुक (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तां | तद् (२.१) |
| पश्यति | पश्यति (√दृश् लट् प्र.पु. एक.) |
| चारुदर्शनाम् | चारु–दर्शन (२.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त | स्य | म | ध्ये | भ | व | न | स्य | वा | न | रो |
| ल | ता | गृ | हां | श्चि | त्र | गृ | हा | न्नि | शा | गृ | हान् |
| ज | गा | म | सी | तां | प्र | ति | द | र्श | नो | त्सु | को |
| न | चै | व | तां | प | श्य | ति | चा | रु | द | र्श | नाम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||