नियुज्यमानाश्च गजाः सुहस्ताः; सकेसराश्चोत्पलपत्रहस्ताः ।
बभूव देवी च कृता सुहस्ता; लक्ष्मीस्तथा पद्मिनि पद्महस्ता ॥
नियुज्यमानाश्च गजाः सुहस्ताः; सकेसराश्चोत्पलपत्रहस्ताः ।
बभूव देवी च कृता सुहस्ता; लक्ष्मीस्तथा पद्मिनि पद्महस्ता ॥
अन्वयः
पद्मिनि in a lotuspond, सुहस्ता having beautiful hands, सकेसराश्च with filaments, उत्पलपत्रहस्ताः blue lotuses by their trunk carried, लक्ष्मीः goddess of wealth, नियुज्यमानास्तु stationed in place, गजाः elephants, तथा similarly, पद्महस्ता holding a lotus in hand, सुहस्ता of beautiful hand, देवी च goddess, कृता drawn, बभूव appeared.M N Dutt
There were elephants possessed of graceful trunks, bearing filaments; and with their trunks bearing lotus leaves, engaged in showering water on Lakshmi); as well as the goddess, made with fair arms, seated on a pool with a lotus in her hand.Summary
He saw on it lotus ponds, artificial elephants with shapely trunks, offering to Laxmi who herself was a lotus, holding in her beautiful hands blue lotuses shining with filaments.पदच्छेदः
| नियुज्यमानाश्च | नियुज्यमान (√नि-युज् + शानच्, १.३)–च (अव्ययः) |
| गजाः | गज (१.३) |
| सुहस्ताः | सुहस्त (१.३) |
| सकेसराश्चोत्पलपत्रहस्ताः | स (अव्ययः)–केसर (१.३)–च (अव्ययः)–उत्पल–पत्त्र–हस्त (१.३) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| देवी | देवी (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कृता | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| सुहस्ता | सुहस्त (१.१) |
| लक्ष्मीस्तथा | लक्ष्मी (१.१)–तथा (अव्ययः) |
| पद्मिनि | पद्मिन् (७.१) |
| पद्महस्ता | पद्म–हस्त (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | यु | ज्य | मा | ना | श्च | ग | जाः | सु | ह | स्ताः |
| स | के | स | रा | श्चो | त्प | ल | प | त्र | ह | स्ताः |
| ब | भू | व | दे | वी | च | कृ | ता | सु | ह | स्ता |
| ल | क्ष्मी | स्त | था | प | द्मि | नि | प | द्म | ह | स्ता |