ततस्तु रामस्य निशम्य वाक्यं; विभीषणः शक्रसमानवीर्यः ।
शशंस रामस्य बलप्रवेकं; महात्मनां राक्षसपुंगवानाम् ॥
ततस्तु रामस्य निशम्य वाक्यं; विभीषणः शक्रसमानवीर्यः ।
शशंस रामस्य बलप्रवेकं; महात्मनां राक्षसपुंगवानाम् ॥
अन्वयः
ततः thereupon, शक्रसमानवीर्यः hero equal to Indra, विभीषणः Vibheeshana, रामस्य Rama's, वाक्यम् words, निशम्य on hearing, महात्मनाम् great soul, राक्षसपुङ्गवानाम् among the Rakshasa leaders, बलप्रवेगम् endowed with great strength, रामस्य to Rama, शशंस revealed.M N Dutt
Then hearing Rama's speech, Vibhisana, possessed of the prowess of Sakra himself, informed Råma anent that foremost of hosts consisting of that flower of high souled Räkş asas, saying.Summary
Thereupon, Vibheeshana, equal to Indra in valour, on hearing the great soul Rama, revealed about the Rakshasa army endowed with great strength.पदच्छेदः
| ततस्तु | ततस् (अव्ययः)–तु (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| निशम्य | निशम्य (√नि-शामय् + ल्यप्) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| शक्रसमानवीर्यः | शक्र–समान–वीर्य (१.१) |
| शशंस | शशंस (√शंस् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| बलप्रवेकं | बल–प्रवेक (२.१) |
| महात्मनां | महात्मन् (६.३) |
| राक्षसपुंगवानाम् | राक्षस–पुंगव (६.३) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्तु | रा | म | स्य | नि | श | म्य | वा | क्यं |
| वि | भी | ष | णः | श | क्र | स | मा | न | वी | र्यः |
| श | शं | स | रा | म | स्य | ब | ल | प्र | वे | कं |
| म | हा | त्म | नां | रा | क्ष | स | पुं | ग | वा | नाम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||