पदच्छेदः
| जयश्च | जय (१.१)–च (अव्ययः) |
| विपुलः | विपुल (१.१) |
| प्राप्तो | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.१) |
| मृत्युश्च | मृत्यु (१.१)–च (अव्ययः) |
| प्रतिषेधितः | प्रतिषेधित (√प्रति-सेधय् + क्त, १.१) |
| सुयुद्धेन | सु (अव्ययः)–युद्ध (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| लोकास्तत्र | लोक (१.३)–तत्र (अव्ययः) |
| सुतोषिताः | सु (अव्ययः)–तोषित (√तोषय् + क्त, १.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | य | श्च | वि | प्लु | लः | प्रा | प्तो |
| मृ | त्यु | श्च | प्र | ति | षे | धि | तः |
| सु | यु | द्धे | न | च | ते | स | र्वे |
| लो | का | स्त | त्र | सु | तो | षि | ताः |