अन्वयः
वानरश्रेष्ठः foremost of the Vanaras, सूर्यरमशिसमप्रभम् radiance of sun's rays, आयसम् shone, परिघम् iron bar, गृह्य taking, समरे to battlefield, महापार्श्वे Mahaparsva, न्यपातयत् flung on
Summary
The foremost of the Vanaras (Angada), taking an iron bar flung on Mahaparsva in the battlefield.
पदच्छेदः
| आयसं | आयस (२.१) |
| परिघं | परिघ (२.१) |
| गृह्य | गृह्य (√ग्रह् + क्त्वा) |
| सूर्यरश्मिसमप्रभम् | सूर्य–रश्मि–सम–प्रभा (२.१) |
| समरे | समर (७.१) |
| वानरश्रेष्ठो | वानर–श्रेष्ठ (१.१) |
| महापार्श्वे | महापार्श्व (७.१) |
| न्यपातयत् | न्यपातयत् (√नि-पातय् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | य | सं | प | रि | घं | गृ | ह्य |
| सू | र्य | र | श्मि | स | म | प्र | भम् |
| स | म | रे | वा | न | र | श्रे | ष्ठो |
| म | हा | पा | र्श्वे | न्य | पा | त | यत् |