अन्वयः
उत्सेकेन out of pride, अभिपन्नस्य overpowered, गर्हितस्य vanity, अहितस्य च hurtful, तस्यकर्मणः your action, सुमहत् great, फलम् result, अद्य today, इदानीम् this way, प्राप्नुहि attained
M N Dutt
Today receive the mighty fruit of that infamous act done through pride, productive of evil.* *Remarks Rāmānuja, 'here and in the next world.'
Summary
"You will attain the great result of your hurtful action, overpowered by pride and vanity today."
पदच्छेदः
| उत्सेकेनाभिपन्नस्य | उत्सेक (३.१)–अभिपन्न (√अभि-पद् + क्त, ६.१) |
| गर्हितस्याहितस्य | गर्हित (√गर्ह् + क्त, ६.१)–अहित (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कर्मणः | कर्मन् (६.१) |
| प्राप्नुहीदानीं | प्राप्नुहि (√प्र-आप् लोट् म.पु. )–इदानीम् (अव्ययः) |
| तस्याद्य | तद् (६.१)–अद्य (अव्ययः) |
| सुमहत् | सु (अव्ययः)–महत् (२.१) |
| फलम् | फल (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| उ | त्से | के | ना | भि | प | न्न | स्य |
| ग | र्हि | त | स्या | हि | त | स्य | च |
| क | र्म | णः | प्रा | प्नु | ही | दा | नीं |
| त | स्या | द्य | सु | म | ह | त्फ | लम् |